Copyright © Random Rants
Tuesday, October 2, 2012

zindaggi



इक ज़िंदगी जो पहले थी
थोड़ी हँसती थी थोड़ी खिलखिलाती थी

थोड़ा सा गुस्सा होती थी
पर जल्दी से मान जाती थी

आँखो मे मस्ती लिए
जब मेरे पास आती थी

कानो मे फुसफुसा के कूछ
झट से भाग जाती थी

अब तस्वीरें रह गई हैं
उनमे ही बस्ती है वो

देखता हूँ जब उन्हे
मुझपे ही हँसने लगती है वो

ज़िंदगी अब जो मेरी है
वो थोड़ी उदास है

कैसे मिलूं उसे में
उस ज़िंदगी से जो पहले थी.....

0 comments:

Post a Comment