Copyright © Random Rants
Tuesday, October 2, 2012

zindaggi - II


ज़िन्दगी एक सीख  है,
सब कुछ सिखा देती है 

एक पल साथ, 
तो दूजे दगा देती है 

अचानक से कोई तीर 
सीने  में उतर जाता है 

हर सपने को चूर चूर
और हर आस को भेद जाता है 

जिंदादिली तो जिंदा नहीं रह पाती है 

और गम का प्याला पी के 
पता  नहीं कहाँ खो जाती है 

चुप रहके भी कोई
चुप नहीं रह पाता है 

ना कहते हुए भी 
सब कुछ कह जाता है 

डर है के अन्दर से खाए चला जाता है 

और इंसान 
आहें भरता सिसकियाँ लेता 
घुटता रह जाता है 
रोता रह जाता है

1 comments: