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Sunday, March 2, 2014

खोज

क्या खोज रहा है, किसे ढूँढ रहा है
हर एक चेहरे मे, हर किसी के ज़ेहन मे
किसके लफ़्ज़ों की फुसफुसाहट सुनने की कोशिश कर रहा है

झोंक दिया तूने खुद को हर ज़लज़ले मे
दबा ली आवाज़ अपनी गहरे समुन्दरो मे
खुद को ज़ार ज़ार करने का कौनसा नया आयाम ढूँढ रहा है

खूब सुनी तूने सब से, खूब सहता रहा है
हर मंदिर मे, हर मज़्ज़िद मे, फरमान लगाता फिर रहा है
अब कौनसी दुआ है तेरी जिसे पाने के लए इतना तड़प रहा है

क्या नही मिला है तुझे, क्या कमी कहीं दिखती है
तुझे तेरे नसीब के मुताबिक सब चीज़ पहले ही मिलती है
फिर कौनसी ऐसी लड़ाई है जिसके लए खुद को तैयार कर रहा है

क्या खोज रहा है, किसे ढूँढ रहा है

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