हर चेहरे पे मायूसी है
हर कदम पे सन्नाटा है
चाहते हुए भी कोई
कुछ नहीं कह पाता है
रह गई हैं तो बस सिसकियाँ
और चंद अभागे लोग
कहीं ना कहीं वो भी चाहते होंगे
अपनो के साथ चढ़ जाना काल के भोग
उन लोगों के लिए
उन सिसकिओं के लिए
उन चेहरों के लिए
और उन टूटी हुई सी आशाओं के लिए
एक आवाज़ उठाते हैं, दुआ करते हैं,
अपना इक छोटा सा हाथ बढ़ते हैं
Please pray for JAPAN and its people
God bless the souls

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