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Tuesday, October 23, 2012

kaayal

बड़े दिनों के बाद इक कलाम आया है
दिल की गहराईयों से उठ के छोटा सा पैग़ाम लाया है 

कहाँ तक दबा कर रखूँगा इस एहसास को 
जो तुम याद आये, तो भूल गया हूँ भूख प्यास को

दर्द बहुत है, गुज़ार चूका हूँ कई सितम 
सब हो जायेगा फना, मुड़  के जो तुम देख लो 
सबसे पीछे खड़े हैं हम.... 

तुम्हारी उस हसी के, उन चंद लम्हों के, अल्फाजों के, इत्मीनान के पलों के, आहट के, छुअन के 
कायल हैं हम......
Monday, October 22, 2012

the dream

the last dance, your last smile, 
the way you moved around with your hand in mine... 

its been a while since that feeling, 
your feet on mine, together, dancing, moving... 

i know not when you went away, 
and why it happened that way... 

its just me and my thoughts now... 
dancing the last dance...
Tuesday, October 2, 2012

zindaggi - II


ज़िन्दगी एक सीख  है,
सब कुछ सिखा देती है 

एक पल साथ, 
तो दूजे दगा देती है 

अचानक से कोई तीर 
सीने  में उतर जाता है 

हर सपने को चूर चूर
और हर आस को भेद जाता है 

जिंदादिली तो जिंदा नहीं रह पाती है 

और गम का प्याला पी के 
पता  नहीं कहाँ खो जाती है 

चुप रहके भी कोई
चुप नहीं रह पाता है 

ना कहते हुए भी 
सब कुछ कह जाता है 

डर है के अन्दर से खाए चला जाता है 

और इंसान 
आहें भरता सिसकियाँ लेता 
घुटता रह जाता है 
रोता रह जाता है

jane anjane



हर एक लम्हा, एक एक पल 
याद ज़रूर आएगा वो बीता हुआ कल 

चाहत की डगर पे चलने की कोशिश 
कांटो सी चुभती है सितारों की गर्दिश 

जाने अनजाने कोई अच्छा लग जाना 
उसका वक़्त, उसका साथ नसीब हो पाना 

आँखों की मस्ती चेहरे पे ख़ुशी 
जन्नत सी हो गई थी ज़िन्दगी  

घिर गयी है दुनिया घने बादलों से 
लगता है अब तो रह जाएगी उजड़ के 

दूर दूर से रहने लगें हैं वो अब 
चूर चूर हो गया है सब 

जीने की ख्वाहिश मर सी रही है
अब तो हवा भी ज़हर लग रही है... 

aaj fir se


कलाम उठाई है आज फिर से, 
लिखने बैठा हूँ बोहोत दिनों बाद आज फिर से...

दिल की लिखूं, दिमाग़ की लिखूं, खुद की कहूँ, या किसिको पैगाम लिखूं,

इसी सोच मे खोया हूँ आज फिर से...

कोरा पन्ना दबा हुआ है हाथ के नीचे,

उसे ही बर्बाद करने निकल पड़ा हूँ आज फिर से...

कुछ कहने का मन तो है,

पर लफ्ज़ खो गये हैं आज फिर से...

जाने क्यू कलाम उठाई है,

क्या कहने बैठा हूँ आज फिर से...

zindaggi



इक ज़िंदगी जो पहले थी
थोड़ी हँसती थी थोड़ी खिलखिलाती थी

थोड़ा सा गुस्सा होती थी
पर जल्दी से मान जाती थी

आँखो मे मस्ती लिए
जब मेरे पास आती थी

कानो मे फुसफुसा के कूछ
झट से भाग जाती थी

अब तस्वीरें रह गई हैं
उनमे ही बस्ती है वो

देखता हूँ जब उन्हे
मुझपे ही हँसने लगती है वो

ज़िंदगी अब जो मेरी है
वो थोड़ी उदास है

कैसे मिलूं उसे में
उस ज़िंदगी से जो पहले थी.....

rahein


ज़िंदगी के राहों मे अकेले रह गये हम
चलते चलते ना जाने कब थक के गिर गये हम

देखा जब उठ के पीछे मुड़ के

उन लम्हो को, उन यादों को, कुछ खुशिओं को, कुछ बहारों को,

अश्कों के मैखनों मे खो गये हम


कोई साथ ना रहा, शायद हमने पीछे छोड़ दिया

जो रिश्ते थे अच्छे, उन्हे कच्चा समझ के तोड़ दिया....

पर अब होता है अफ़सोस उन्ही बातों, यादों, मुलाक़ातों पे

के क्यू ना समझ पाया था कीमत जब साथ सब थे

ज़िंदगी के राहों मे अकेले रह गये हम

चलते चलते ना जाने कब थक के गिर गये हम

boondein - II


यूँ देख रही हैं आँखें बरसते पानी को...
की बहता जा रहा है मन उन बूँदों में...

आए घनेरे बदल आए हो तुम क्यों...
साथ क्यूँ ना लाए मेरे यार को...

मौसम नम है, नम हैं आँखें...
उमड़ रहें हैं जज़्बात दिल में...

यूँ देख रही हैं आँखें बरसते पानी को...
की बहता जा रहा है मन उन बूँदों में...

barish ki boondein


तुम्हे याद करता हूँ.... 

बारिश की हर बूँद के साथ मै तुम्हें याद करता हूँ...

क़दमों की हर आहट के साथ मै तुम्हें  याद करता हूँ...

चलता हूँ जब रास्तों पे, भीड़ में तन्हा अकेले, मै तुम्हें याद करता हूँ...

चाय की हर चुस्की के साथ, कॉफी के नर्म एहसास के साथ, मै तुम्हे याद करता हूँ...

कूछ अधूरा सा लगता है पर पूरा हो जाता है जब तुम्हे याद करता हूँ...

बारिश की हर बूँद के साथ मै तुम्हें याद करता हूँ....

mazil-e-mushkil


पाता हूँ खुदको असमंजस की स्थिति में
ज़िंदगी नही आती है समझ ये
चाहतों का ढेर लगता जा रहा है
आशाओं का मचान गिरता नज़र आ रहा है

कोई तो इक राह दिखलाओ
मंज़िल का कोई रास्ता बतलाओ
थकता - टटोलता जा रहा हूँ
अंधेरे में चलता जा रहा हूँ

For the tsunami hit in Japan


हर चेहरे पे मायूसी है
हर कदम पे सन्नाटा है

चाहते हुए भी कोई
कुछ नहीं कह पाता है

रह गई हैं तो बस सिसकियाँ
और चंद अभागे लोग

कहीं ना कहीं वो भी चाहते होंगे
अपनो के साथ चढ़ जाना काल के भोग

उन लोगों के लिए
उन सिसकिओं के लिए
उन चेहरों के लिए
और उन टूटी हुई सी आशाओं के लिए

एक आवाज़ उठाते हैं, दुआ करते हैं,
अपना इक छोटा सा हाथ बढ़ते हैं


Please pray for JAPAN and its people
God bless the souls

paigam


मन किया है एक पैग़ाम लिखने का...
चंद शब्दों को, कुछ लफ़्ज़ों को इक हार में पिरोने का...

छितराइ हुई भावनाएं हैं
बिखरी हुई आशाएँ हैं

कहाँ से शुरू करूँ हाल-ए-बयान मै दिल का

तुम ही बोलो
ज़रा इस ताले को खोलो 
कह दो ना "हाल कैसा है जनाब का.."

ek rah, ek chah


हो चली हैं राह धुंधली
अब तो साहिल भी नज़र नही आता है

ज़िंदगी की इस कसौटी पे अब
सिर्फ़ हार का मंज़र नज़र आता है

ना दुआ है ना दावा है
सिर्फ़ इक झीनी सी लौ की आशा है

हो चली हैं राह धुंधली
अब तो साहिल भी नज़र नही आता है....

intezaar


इंतहाँ हो गई इन्तज़ार की...
धुँधला गई है अब तो आस भी...

अरसा हो गया है उस एहसास को...
मै ही जनता हूँ तुम कितने ख़ास हो...

नज़रें यूँ ना अब चुराओ तुम...
बैठे बैठे कहीं हो ना जाउं मै गुम...

a new year, a new beginning...

another year passed by... looks like time does fly...
(it)gave me some moments high and also a few to cry...
will keep in mind the lessons learnt and go ahead with my head held high....

Bus Yun Hi...


बस यूँ ही...
यहाँ आए थे जब हम ज़िंदगी यूँ हसीन ना थी
दोस्ती हुई फिर हमारी और मिलके राह हसीन कर दी...

कांटें थे राहों में, निराशा भी साथ ही चलती थी
पर मिलके हम साथ चले और बदल दी किस्मत इस दुनिया की...

साथ जीए हैं साथ पिए हैं... 
लाया है बदलाव ऐसा के शरमा जाए जन्नत भी...
बस यूँ ही...

a little friendship day dedication


आते हैं ज़िंदगी में लोग नये ही रोज़...
पर जो रह जाते हैं इस दिल में उन्हे कहते हैं दोस्त...
उनकी दोस्ती के नाते जान भी कुर्बान है
दोस्ती के इस दिन पे उन सब को सलाम है...
Monday, October 1, 2012

dhool khati kitabein


धूल खाती किताबें आले मे रखी हैं
कुछ बातें लिए कुछ यादें समेटे, जाने कब से वहीं हैं

आज अचानक ही हाथ बढ़ गया उनकी तरफ
के शायद कोई खोया पन्ना मिल जाए

काग़ज़ों को पलटने से
क्या पता कोई लम्हा वापस मिल जाए

पलट के देखा जब उन पन्नो को
मिले कुछ वक़्त के खोए पल
कुछ हसीन तो कुछ पागल

याद करके उन्हे बंद कर दी वो किताब अब
और फिर रख दिया उसे उन्ही धूल वाली किताबों के साथ