बड़े दिनों के बाद इक कलाम आया है
दिल की गहराईयों से उठ के छोटा सा पैग़ाम लाया है
कहाँ तक दबा कर रखूँगा इस एहसास को
जो तुम याद आये, तो भूल गया हूँ भूख प्यास को
दर्द बहुत है, गुज़ार चूका हूँ कई सितम
सब हो जायेगा फना, मुड़ के जो तुम देख लो
सबसे पीछे खड़े हैं हम....
तुम्हारी उस हसी के, उन चंद लम्हों के, अल्फाजों के, इत्मीनान के पलों के, आहट के, छुअन के
कायल हैं हम......
दिल की गहराईयों से उठ के छोटा सा पैग़ाम लाया है
कहाँ तक दबा कर रखूँगा इस एहसास को
जो तुम याद आये, तो भूल गया हूँ भूख प्यास को
दर्द बहुत है, गुज़ार चूका हूँ कई सितम
सब हो जायेगा फना, मुड़ के जो तुम देख लो
सबसे पीछे खड़े हैं हम....
तुम्हारी उस हसी के, उन चंद लम्हों के, अल्फाजों के, इत्मीनान के पलों के, आहट के, छुअन के
कायल हैं हम......
